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Monkey Pox Virus: मंकी पॉक्स वायरस क्या है, कितना ख़तरनाक है और इसके लक्षण क्या-क्या हैं?

By: Veer Singh

Published On: 22/08/2024

Monkey Pox Virus
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कोरोना महामारी से अब तक दुनिया पूरी तरह से उभरी भी नहीं की एक नए वायरस ने जन्म ले लिया जिसका नाम है मंकी पॉक्स यह वाइरस अमेरिका कनाडा ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से ज्यादा देशों में फैल चुका है चलिए आपको आज की इस पोस्ट मे हम आपको इस वायरस के बारे में सब कुछ बताते हैं

 मंकीपॉक्स कितना बड़ा है

मंकी पॉक्स कितना बड़ा है मंकी Monkey Pox Virus के कारण होता है जो स्मालपॉक्स की फैमिली का ही एक वायरस है यह सेंट्रल और पश्चिमी अफ्रीकी देशों के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है इस वायरस के दो मेंस्ट्रीम है बेस्ट अफ़्रीका और सेंट्रल अफ्रीकन अब बात करते हैं मंकी पॉक्स के शुरुआती लक्षणों के बारे मे ।

 मंकीपॉक्स के  शुरुआती लक्षण

Monkey Pox Virus के लक्षणों की शुरुआती लक्षणों में बुखार सिर दर्द सूजन कमर दर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल है बुखार होने पर त्वचा पर रश हो सकते हैं जिसकी शुरुआत अक्सर चेहरे से होती है फिर शरीर के दूसरे हिस्सों में यह फैल जाता है आमतौर पर हथेलियां और पैरों के तलवों पर ज्यादा होता है रेस पर बहुत खुजली हो सकती है दर्द हो सकता है इसमें कई बदलाव होते हैं औरआखिर में इसकी पापड़ी बन जाती है जो बाद में गिर जाती है जिसके बाद घाव के निशान भी पड़ सकते हैं यह संक्रमण आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है और 14 से 21 दिनों तक रहता है

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संक्रमण कहां से हो सकता है

 संक्रमण कहां से हो सकता है किसी संक्रमित शख्स के नजदीकी संपर्क में आने से मंकी पॉक्स हो सकता है इसका वायरस हमारी त्वचा पर किसी कट से या आंख नाक या मुंह के रास्ते शरीर में जा सकता है सेक्स के दौरान भी यह वाइरस एक शख्स से दूसरे शख्स में जा सकता है इसके अलावा यह संक्रमित जानवरों जैसे बंदरों चूहा और गिलहरियों से भी फैल सकता है साथ ही अगर बिस्तर या कपड़ों पर वायरस है तो उसके संपर्क में आने से भी यह फैल सकता है 

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मंकी पॉक्स कितना खतरनाक है

Monkey Pox Virus कितना खतरनाक है अब तक इस वायरस के ज्यादातर माइल्ड यानी हल्के मामले ही देखने को मिले हैं यानी मरीज की हालत इतनी खराब नहीं होती कई बार यह चेचक यानी चिकन पॉक्स जैसा होता है और कुछ ही हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है हालांकि कुछ मामलों में मरीज की हालतगंभीर हो सकती है पश्चिमी अफ्रीका में इसे मौत होने के मामले भी दर्ज किए गए हैं इस वायरस से जुड़ी एक और बात कही जा रही है कि इससे गे  और बायसेक्सुअल पुरुषों को ज्यादा खतरा है क्या सच में ऐसा है वैसे देखा जाए तो कोई भी शख्स जो Monkey Pox Virus से संक्रमित हो उसके संपर्क में आने से किसी को भी यह बीमारी हो सकती है हालांकि ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने कहा है कि ब्रिटेन और यूरोप में हाल फिलहाल में कई जी और बायसेक्शन पुरुषों को इस वायरस से संक्रमित पाया गया इसलिए एजेंसी ने उन्हें खास तौर पर लक्षणों को लेकर सतर्क रहने और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने के लिए कहा है

इस बीमारी का नाम  मंकी बॉक्स कैसे पड़ा 

अब सबसे अहम सवाल की इसके बड़े स्तर पर फैलने की कितनी आशंका है इसका जवाब जानने के लिए इस वायरस की हिस्ट्री समझना जरूरी है दरअसल साल 1958 में सबसे पहले यह वाइरस एक बंदर में मिला था इसी वजह से इसका नाम मंकी पॉक्स पड़ गया 1970 के बाद से 10 अफ्रीकी देशों में छोटे-छोटे आउटब्रेक हुए हैं 2003 में अमेरिका में इस वायरस के मामले सामने आए थे और यह पहली बार था कि अफ्रीका के बाहर Monkey Pox Virus के मामले देखे गए वहां इंसानों में यह वाइरस बाहर से राइडर जानवरों से आया था अमेरिका में उसे वक्त तक  81 मामले दर्ज किए गए थे और कोई मौत नहीं हुई थी 2017 में नाइजीरिया में सबसे बड़ा आउटब्रेक हुआ था यहां 172 मामले सामने आए थे और 75 फ़ीसदी पीड़ित 21 से 40 साल की उम्र के बीच के पुरुष थे तो हम कह सकते हैं कि यह एक रेयर वायरल इंफेक्शन है जो आसानी से नहीं फैला और आम तौर पर गंभीर रूप से बीमार नहीं करता यह भी कहा जा रहा है कि बहुत बड़ी आबादी में इसके फैलने की आशंका कम है और आखिर में बात की मंकी पॉक्स का इलाज क्या है

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मंकी पॉक्स का इलाज क्या है

मंकी पॉक्स के लिए अलग से कोई वैक्सीन नहीं है लेकिन स्मालपॉक्स से बचाव के लिए लगाई जाने वाली वैक्सीन ही मंकी पॉक्स से भी 85% तक बचाव कर सकती है इसके अलावा एंटीवायरस दवाइयां से भी मदद मिल सकती है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताते हुए कहा है कि मंकी पॉक्स के हाल में सामने आए मामले असामान्य है और ऐसे देश में पहले हैं जहां पहले कभी नहीं हुए

Veer Singh

Veer Singh is an experienced author and blogger with 2+ years of experience writing about automobile, lifestyle, and technology. He shares useful tips, the latest information, and practical guidance with readers based on his experience and research, using simple and easy-to-understand language.” ✍️
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