Gold Reserves in India: भारत को लगा बड़ा झटका है यह झटका लगा है सोने के भंडार में देश के सोने के भंडार में बड़ी गिरावट आई है इस गिरावट का सीधा असर आम आदमी पर पड़ सकता है लेकिन सवाल यह है कि देश का सोने का भंडार कितना काम हुआ है सोने के भंडार में गिरावट क्यों आई है इसका क्या मतलब है
पहले सोने चांदी की कीमतों पर एक नजर
सोने के भंडार के बारे में आपको बताते हैं लेकिन पहले सोने चांदी की कीमतों पर एक नजर डाल लेते हैं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 जून को 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 3947 की गिरावट के साथ 155600 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था वहीं 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 16595 की गिरावट के साथ 2 लाख 48000 प्रति किलो पर बंद हुई थी
सोने के भंडार के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक
अब बात करते हैं सोने के भंडार के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 29 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के गवर्नर 18 अरब डालर रह गई यानी आरबीआई की तिजोरी में मौजूद सोने की कुल कीमत पहले के मुकाबले कम हो गई है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि देश आर्थिक संकट में है या Gold Reserves बेच दिया गया है
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत
कई बार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में की वजह से भी Gold Reserves की कुल वैल्यू घट बढ़ जाती है किसी भी देश के लिए सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा का कवच भी होता है वैश्विक संकट युद्ध आर्थिक अस्थिरता या वित्तीय के वक्त देश की वित्तीय ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है
दुनिया के बड़े गोल्ड रखने वाले देश
भारत पिछले कुछ वर्षों में लगातार को मजबूत करता रहा यही वजह है जो दुनिया के बड़े Gold Reserves रखने वाले देशों में भारत की स्थिति को मजबूत बनाता है एसडीआर और आईएमएफ भारत की स्थिति की बात करें तो गोल्ड सर में गिरावट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्सों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है
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भारत का रिजर्व स्तर इतना मजबूत
देश के पास किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद है गवर्नर ने कहा कि आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा बाजार में हेसचेव करने रुपए को स्थित रखना और वित्तीय बाजारों में अत्यधिक उतार-जगह को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध है उनके मुताबिक भारत का रिजर्व स्तर इतना मजबूत है कि इससे लगभग 11 महीने के आयात का खर्च निकल जा सकता है और देश के बाहरी कर्ज का करीब 89.1 पीसी हिस्सा कर किया जा सकता है
कच्चे तेल और ऊर्जा की प्रति कीमतें
हालांकि आरबीआई ने यह भी मन की कुछ जोखिम अभी खत्म नहीं हुए सबसे बड़ी चुनौतियां हैं कच्चे तेल और ऊर्जा की प्रति कीमतें वैश्विक बाजार को लेकर अनिश्चित पश्चिम एशिया समेत कई क्षेत्रों में जारी भू राजनीतिक तनाव अगर तेल महंगा होता है तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं जिससे चालू खाता घाटा यानी करंट अकाउंट डेफिसिट पड़ सकता है
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भारत के सोने के भंडार में बड़ा झटका
कुल मिलाकर भारत के सोने के भंडार में बड़ा झटका लगे हालांकि सोने के भंडार में गिरावट के बावजूद भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है आरबीआई के मुताबिक 29 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 938 मिलियन डॉलर बड़कर 682.321 अरब डॉलर पर पहुंच गया इससे पहले समाप्त में इसमें 7.711 की बड़ी गिरावट आई थी