मिडल ईस्ट में जारी जंग के बीच दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों में से एक गोल्डमैन सैक्स से एक नई चेतावनी दी है बैंक का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में जारी टकराव जल्दी नहीं रुका तो Petrol Price तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकती है और इस चेतावनी की वजह सिर्फ जियोपॉलिटिक्स ही नहीं है बल्कि अब वास्तविक सप्लाई बाधित होने लगी है
Petrol Price तेल की कीमतों मे लगातार इजाफा
इसका सबसे ताजा उदाहरण है खाड़ी का बड़ा तेल उत्पादक देश कुवैत कुवैत ने शनिवार को घोषणा की कि उसने अपना ऑयल प्रोडक्शन और रिफाइनिंग आउटपुट कम करना शुरू कर दिया है कारण खाड़ी से Petrol Price ले जाने वाले टैंकर लगभग रुक गए हैं समस्या की जड़ वही है जिसकी चर्चा अब पिछले कुछ दिनो से लगातार की जा रही है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज ये फारस की खाड़ी से बाहर निकलने का सबसे अहम संकरी रास्ता है दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी होकर गुजरती है
यह भी पढ़े: Budget 2025: पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत, आम जनता को बड़ी खुशखबरी
इराक और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव से रास्ता ठप्प
इराक और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बाद से इराक का लगभग यह रास्ता ठप्प हो गया है टैंकर कंपनियां जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं और कई जहाजों ने यात्रा रोक दी है अब इसका सीधा असर तेल उत्पादक देशों पर पड़ रहा है अगर जहाज नहीं निकलेंगे तो बंदरगाहों पर तेल जमा होगा और जब स्टोरेज भर जाता है तो देशों को मजबूर होकर प्रोडक्शन कम करना पड़ता है पहले इराक ने लगभग डेढ़ मिलियन बैरल प्रतिदिन प्रोडक्शन घटा दिया है और अब कुवैत ने भी एहतियात के तौर पर उत्पादन कम कर दिया है
कुवैत करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल पैदा कर रहा था
जनवरी की बात करें तो कुवैत करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल पैदा कर रहा था लेकिन अब उसने कहा है कि स्थिति सुधारने पर ही उत्पादन सामान्य किया जाएगा जब बाजार को ये संकेत मिला की अब सिर्फ खतरा नहीं है तो बाजार में तेल की कमी पैदा हो सकती है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकती हैं संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है,
यह भी पढ़े: Adani Wilmar Share News : आज के बाजार में निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
कतर अकेले दुनिया के लगभग बीस प्रतिशत एलएनजी एक्सपोर्ट करता है
दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में से एक कतर ने भी हालिया हमलों के बाद गैस उत्पादन रोक दिया है कतर अकेले दुनिया के लगभग बीस प्रतिशत एलएनजी एक्सपोर्ट करता है यानी ऊर्जा बाजार में Petrol Price और गैस दोनों सप्लाई चेन पर दबाव बन रहा है अगर खासतौर पर कुवैत की बात करें तो भारत की कुल तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत है
तेल की कीमतों में हर दस डॉलर की बढ़ोतरी
सीधे तौर पर देखें तो यह बहुत बड़ा हिस्सा नहीं है लेकिन समस्या ये है कि जब कुवैत जैसे ओपेक उत्पादक प्रोडक्शन कम करते हैं तो ग्लोबल सप्लाई घटती है और Petrol Price तेजी से ऊपर जाती हैं भारत के लिए यह चीज़ महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में हर दस डॉलर की बढ़ोतरी देश के आयात बिल में करीब तेरह से चौदह अरब डॉलर जोड़ देती है
यह भी पढ़े: Adani Wilmar Share Price Today: निवेशकों को क्या करना चाहिए – खरीदें, बेचें या होल्ड करें
भारत के बड़े तेल सप्लायर देश
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का करीब अट्ठासी प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है भारत के बड़े सप्लायर हैं रशिया, इराक, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और कुवैत इनमें से कई देशों का तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के रास्ते भारत तक पहुंचता है अगर इराक का प्रभावित रहता है तो भारत की सप्लाई चेन पर भी दबाव आ सकता है
भारत के लिए एक नया ऊर्जा और महंगाई का संकट
फिलहाल तस्वीर कुछ ऐसी बन रही है कि एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में जहाजों की आवाजाही रुक रही है दूसरी तरफ कुवैत जैसे देश प्रोडक्शन कम कर रहे हैं और तीसरी तरफ गोल्डमैन सैक्स तेल के सौ डॉलर प्रति बैरल तक जाने की चेतावनी दे रहा है अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचता है तो यह सिर्फ युद्ध नहीं रहेगा बल्कि दुनिया खासकर भारत के लिए एक नया ऊर्जा और महंगाई का संकट बन सकता है